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मुंबई : बढ़ते वायु प्रदूषण पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने निगरानी के लिए एक हाई-पावर कमेटी गठित करने का निर्णय लिया, जो रोज़ाना समीक्षा करेगी। कोर्ट ने कहा कि अब तक के कदम नाकाफी रहे और दिसंबर में हालात बहुत गंभीर थे।
मुंबई और आसपास के इलाकों में बढ़ते वायु प्रदूषण पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए एक उच्चस्तरीय (हाई-पावर) समिति गठित करने का फैसला किया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि अब तक राज्य और नगर निकायों द्वारा उठाए गए कदम नाकाफी हैं और आम लोगों को शुद्ध हवा में जीने का अधिकार मिलना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि वह किसी पर आरोप नहीं लगा रहा, बल्कि परिणाम सुनिश्चित करना चाहता है।
क्या है अदालत की चिंता?
मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर की अगुवाई वाली खंडपीठ ने कहा कि अक्टूबर 2023 में स्वतः संज्ञान लेने के बाद से हालात में अपेक्षित सुधार नहीं दिखा। नवंबर 2023 में अल्पकालिक, मध्यम और दीर्घकालिक उपाय सुझाए गए थे, लेकिन ज़मीनी असर नजर नहीं आया। दिसंबर में प्रदूषण स्तर “बहुत गंभीर” तक पहुंचने की रिपोर्ट ने अदालत की चिंता बढ़ाई।
अब तक के कदम क्यों नाकाम रहे?
अदालत ने कहा कि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मुंबई-नवी मुंबई की नगरपालिकाओं की ओर से दाखिल हलफनामे पर्याप्त नहीं हैं। प्रयास किए गए होंगे, लेकिन नतीजे दिखाई नहीं दे रहे। कोर्ट ने यह भी माना कि बढ़ते मामलों और सीमित समय के कारण हर हलफनामे की सूक्ष्म जांच संभव नहीं, इसलिए निगरानी के लिए अलग व्यवस्था जरूरी है।

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