मुंबई : मानसून शुरू होने में अब केवल आठ दिन शेष हैं, लेकिन मुंबई में नालों की सफाई और गाद निकालने के काम की रफ्तार और गुणवत्ता को लेकर सभी दलों के नगरसेवकों ने गंभीर चिंता जताई है। शुक्रवार को हुई स्थायी समिति की बैठक में कई नगरसेवकों ने चेतावनी दी कि यदि प्रमुख आउटफॉल और नालों की तत्काल सफाई नहीं की गई तो इस साल भी मुंबई को गंभीर जलभराव का सामना करना पड़ सकता है। अब तक केवल 50 प्रतिशत ही गाद निकाली गई है। जबकि प्रशासन ने 90 प्रतिशत नाला सफाई हो जाने का दावा किया है।
बैठक के दौरान नगरसेवकों ने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर केवल ऊपर तैरता कचरा हटाया जा रहा है, जबकि नीचे जमा गाद और मलबा जस का तस पड़ा हुआ है। साथ ही निकाली गई गाद की वास्तविक मात्रा ठेकेदारों की जीपीएस मॉनिटरिंग व्यवस्था और जलभराव वाले संवेदनशील इलाकों की अनदेखी को लेकर भी सवाल उठाए गए। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की पार्षद सईदा खान ने कहा कि प्रशासन केवल नालों से तैरता कचरा निकाल रहा है, जबकि आउटफॉल और मीठी नदी से जुड़ा महत्वपूर्ण काम नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि यही स्थिति रही तो मानसून के दौरान फिर से बाढ़ जैसी
समस्या खड़ी हो सकती है। कांग्रेस नेता अशरफ आजमी ने सवाल उठाया कि नाला सफाई से निकाली गई भारी मात्रा में गाद आखिर कहां डंप की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि हर साल योजना बनाने में देरी होती है और नाला सफाई की प्रक्रिया जनवरी-फरवरी में ही शुरू हो जानी चाहिए थी। आजमी ने कहा
कि अभी भी 50 प्रतिशत से अधिक काम अधूरा है और कुर्ला, चेंबूर तथा चुनाभट्टी जैसे क्षेत्रों वाले जोन-5 में सबसे अधिक देरी हो रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ ठेकेदार स्कूटर पर जीपीएस डिवाइस लगाकर फर्जी मूवमेंट दिखा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि “मुंबई डूबने वाली है। वहीं पार्षद जमीर कुरैशी ने लापरवाह ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने एम-ईस्ट वार्ड की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि वहां घरों की गलियां सीधे नालों में मिलती हैं।
